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Abheepsa (Kavitha Sangrah)–Hindi Translation of K. V. Dominic’s Poetry

COVER PAGE OF MY HINDI BOOKअभीप्सा

 

के. वी. डोमिनिक

 

 

अनुवाद

संतोष अलेक्‍स

 

 

 

 

 

आमुख

 

 

 

मेरी तीन अंग्रेजी कविता संग्रह “विंगड रीसन”(2010), “राइ्रट सन राईट” (2011) और “मल्‍टीकल्‍चरेल सिंफनी”(2014) में चुनी हुई कविताओं का हिंदी अनुवाद प्रस्‍तुत करते हुए मुझे खुशी हो रही है. इन कविताओं को हिंदी में प्रस्‍तुत करने के लिए डॉ संतोष अलेक्‍स का आभारी हूं.

 

      मेरे सा‍थ कविता देरी से हुई. 48 साल की उम्र में मैं कविताएं लिखने लगा. कारण यह है कि मेरी जिंदगी में किसी प्रकार की परेशानियां नहीं थी. जैसे कि जयंत महापात्र ने लिखा “कविता बुरे दिल से निकलती है एक दिल जो व्‍यक्ति को नेता या हारा हुआ बनाता है, जहां व्‍यक्ति को मूल्‍य एवं रवैया चुनने के लिए बाध्‍य करता है.”

सीमस हीनी, पोएट लोरेट सा मैं खुदी की कविताओं पर टिप्‍पणी करना चाहूंगा. एक कवि के रूप में मैं खुद की जमीर के प्रति उत्‍तरदायी हूं और मैं सामाजिक आलोचना द्वारा किसी संवेदना या संदेश को प्रस्‍तुत करना चाहता हूं. एक प्रोफेसर के रूप में छात्रों के प्रति, संपादक के रूप में शोधार्थी एवं लेखकों के प्रति एवं एक कवि के रूप में सारे मानव के प्रति मेरी वचनबद्धता है. अत: मैं कविता में शैली के बदले में सार को महत्‍व देता हूं. राबर्ट ब्राउन सा मैं कविता में विवादास्‍पद शैली का उपयोग करता हूं जो पाठकों को आकर्षित करती है.

केरल को गोडस आन कंट्री कहा जाता है. यहां काफी हरियाली है और यहां की प्राकृतिक सुंदरता इसे अन्‍य राज्‍यों से अलग करती है और दुनिया के सभी देशों से सैलानी यहां आते हैं. यहां सब साक्षर हैं और ज्‍यादातर युवा स्‍कूल कॉलेज जाते हैं.यहां के लोग पश्चिम से प्रभावित हैं और उनका नकल करते हैं. यहां धर्म हर जगह हावी है. यहां के लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान नहीं बल्कि आत्‍मा मायने रखता है.

भारत के ज्‍यादातर लोग गरीब है और एक वक्‍त की रोटी से वंचित है. इनका दैनिक आय एक डालर से कम है. धार्मिक नेता यह सिखाते हैं कि गरीबों को आहार देने की जिम्‍मेदारी धर्म का नहीं सरकार का है. धर्म का काम प्‍यासी आत्‍माओं को बचाना है. ये धार्मिक नेता इस बात पर गौर नहीं करते कि तंदुरूस्‍थ शरीर में ही आत्‍मा बसती है. धर्म के सहयोग से गरीबी मिटाई जा सकती है. धर्म लोगों के मन में घृणा के बदले दया का भाव पैदा करें.

मेरी कविताओं का प्रमुख सार प्रकृति, मनुष्‍य और ईश्‍वर है. मेरे लिए यह दुनिया बड़ा कंसर्ट या सिंफनी है. सारी सृष्टि अपनी भूमिका निभाते हैं. मेरे लिए विज्ञान और धर्म एक सिक्‍के के दो पहलू हैं. मनुष्‍य सबसे अंतिम खोज है. उसे दूसरे को एवं जीव जंतुओं का सम्‍मान करना चाहिए. मनुष्‍य अपनी बुद्धि को सकारात्‍मक कामों के बजाय नकारात्‍मक कामों के लिए उपयोग करता है. यह विडंबना की बात है कि मनुष्‍य जितना बुद्धिमान और पढा लिखा होता है उतना ही क्रूर और कुटिल होता है. हालांकि इसाई के रूप में मेरा बपतिस्‍मा हुआ, मैं आखिरकार भारतीय हूं और अध्‍यापक एवं कवि के नाते मेरा कर्तव्‍य है कि मैं अपने छात्रों एवं देशवासियों में भारतीय मूल्‍यों की सीख दूं.  मैं जीवात्‍मा और परमात्‍मा में विश्‍वास करता हूं और अहं ब्रहमास्‍मि में भी विश्‍वास करता हूं.  मुझे अद्वैत द्वैत से भी स्‍वीकार्य है. इसलिए मैं मनुष्‍य, ईश्‍वर और प्रकृति द्ववारा घनिष्‍ठ संबंध पाता हूं.

       मनुष्‍य को दूसरों को मारने एवं प्रकृति को नष्‍ट करने का अधिकार नहीं है. लोग आज भौतिक सुख सुविधाओं के पीछे दौड़ रहे हैं और उनमें जो पवित्रता थी वह नष्‍ट हो रही है. दूसरे सहजीवियों को प्‍यार करने के बजाय वह उनका शोषण करता है. धार्मिक, राजनेताओं का काम है कि वे लोगों में खो चुके मूल्‍यों को लौटाए. इसके बजाय ज्‍यादातर नेता माफिया बन गए हैं और लोगों में घृणा भाव पैदा करते हैं. नेता भ्रष्‍ट हैं.

मेरी लेखन का उददेश्‍य भ्रष्‍ट समाज को राह दिखाना है, खासकर युवकों को. आज के युवक गलत राह पर चल रहे हैं. उनको सही मार्ग दिखाने के लिए न कोई मसीहा है या रोल मोडल.

इस किताब में इकतीस कविताएं हैं. पहली कविता मोहम्‍मद राफी के प्रति श्रद्धांजलि है. वे मेरे बहुत प्रिय है और कॉलेज के दिनों से ही मैं उन्‍हें चाहता था . मेरी राय में कोई उसका प्रतिस्‍थापन नहीं कर सकता. “राहुल की दुनिया” में बच्‍चों पर होनेवाले अत्‍याचार का विवरण है. ईश्‍वर के म पर धर्म के नाम पर होनेवाली बातों का जिक्र है. “ओम“ कविता में ओम जो दुनिया की सबसे पहली आवाज थी, उस पर चर्चा है. “ज्‍योतिशास्‍त्र“ में ज्‍योतिशास्‍त्र के बहाने लोगों को ठगने की बात उठाई है. “भारत न 1” में भारत के विकास पर करारा व्‍यंगय है. ”मैं केवल आम का पेड हूं“ में प्रकृति के पक्ष में बातें कही गई है. “काश मैं वापस लौटता“ अंतिम कविता है जहां से पुन: बीते पलों को जीने की इच्‍छा करता हूं.

मैं आर्थस प्रस के प्रकाशक,श्री सुदर्शन केचेरी के प्रति आभारी हूं जिन्‍होंने यह काव्‍य संग्रह हिंदी में प्रकाशित करने का बीड़ा उठाया है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

        

 

 

अनुक्रम

 

 

  1. मोहम्‍मद राफी को श्रद्धांजलि
  2. फूलों का दूकान
  3. राहुल की दुनिया
  4. सुख दु:ख
  5. ईश्‍वर के नाम पर
  6. मेरे बच्‍चे का रूदन
  7. किशोरावस्‍था
  8. एक आनंदमय यात्रा
  9. ओम
  10. अम्मिनी की मृत्‍यु
  11. कैसा जन्‍म
  12. वृंदा
  13. सूर्यग्रहण
  14. जन्‍मकुंडली
  15. संरक्षण
  16. हाथी सनक
  17. भारत नं 1
  18. जात के पागल
  19. अधूरे सपने
  20. मेरे गुसलखाने में मकड़ी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  1. मैं कौन हूं
  2. विश्‍वचैंपियन के आंसू
  3. बीच ब्‍यूटिशियन
  4. बेटा लिखो
  5. कौआ काली सौंदर्य
  6. संकल्‍प
  7. एक निर्भिक कोशिश
  8. मैं केवल आम का पेड़ हूं
  9. मजदूर
  10. भूखे
  11. काश मैं लौट पाता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मोहम्‍मद राफी को श्रद्धांजलि

 

 

तीस साल पहले

मोहम्‍मद राफी स्‍वर्ग पहुंचे

पीड़ा से गुजरते लोगों को

सांत्‍वना देने

ईश्‍वर द्वारा भेजे गए संगीत का गंधर्व

सरल सौम्‍य व शालीन

सरस्‍वती का अनुगृह था उन पर

रियाज की घंटों

जब उन्‍होंने सुर लगाया

ओ दुनिया के रखवाले

सारी दुनिया ने उसे सलाम किया

मार्निंग वाल्‍क पर जाने पर

वह मेरे संग चलते

लता जी के साथ उनके गाए

गानों का क्‍या कहना

नश्‍वरता, तुम्‍हारा नाम मोहम्‍मद राफी है

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

फूलों का दूकान

 

 

मैंने दरवाजा खोला

गुलाब ने मुस्‍कुराकर कहा

सर सुप्रभात

मैंने मुस्कुराया

दरवाजा बंद की

ताला लगाया

और बाहर निकला

पत्‍तों ने मुझसे कहा

यात्रा की मंगलकामनाएं

लिलि फूलों ने कहा

स्‍वास्‍थ्‍य ठीक रहे

मैंने सभी को धन्‍यवाद कर

कॉलेज गया

शाम को लौटते वक्‍त

बेकरी में रूका

मिठाई खरीदने

 

बगल में

फूलों की दूकान थी

हारों में सजाए

गुलाब, लिलि

मुरझा गए थे

 

 

मैंने उनको

बुदबुदाते हुए सुना

अच्‍छी मृत्‍यु के

लिए शुभकामनाएं

मैं चौंक गया

यह मेरे लिए ही नही

आते जाते सभी के लिए था

मैंने खुद को तसल्‍ली दी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

राहुल की दुनिया

 

 

राहुल कलास से बाहर निकलो

अध्‍यापक ने कहा

राहुल रो पड़ा

बाहर खड़ा रहा क्‍लास के

 

उसने गृहकार्य पूरा नहीं किया

आखिर गलती

किसकी थी

शराबी पिता

पीटता है मां को

राहुल को

खाने के थाली को

लात मारता है

रात भर वह सोया नहीं

क्रूर पिता

क्रूर अध्‍यापक

क्रुर दुनिया

बेचारा राहुल

चाहता है प्‍यार

 

 

 

 

 

 

सुख दु:

 

सुख व दु:ख

सिक्‍के के दो भाग हैं

हम इसे

सुबह उछालते हैं

ज्‍यादातर लोगों का

निर्णय गलत निकलता है

खुशी यदा कदा आती है

दु:खमहामारी है

और लंबे समय तक रहता है

खुशी धुंध है

दु:खहिम सा गिरती है

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ईश्‍वर के नाम पर

 

ईश्‍वर के नाम पर

किए गए करतूत ज्‍यादा

ईश्‍वर के नाम पर

किए गए अच्‍छे काम कम

ईश्‍वर के नामपर

किए गए धर्मयुद्ध में

हजारों मारे गए

लोकतंत्र का हनन हुआ

ईश्‍वर के नाम पर

ईश्‍वर के नाम पर

ही पक्षपात ज्‍यादा हुआ

ईश्‍वर के नाम पर

अंधविश्‍वास पनप रहे हैं

ईश्‍वर के नाम पर

जहर घोला जा रहा है

सांप्रदायिकता

 

ईश्‍वर के नाम पर

साम्‍यवादियों का गला

घोंटा जा रहा है

ईश्‍वर के नाम पर

नौ जवान आतंकवादी बन रहे हैं

 

ईश्‍वर के नाम पर कामुकता

पनप रहा है

ईशवर के नाम पर उच्‍च जात

शोषण कर रहे हैं

ईश्‍वर के नाम पर

धर्मनिरपेक्षता व्‍यर्थ करार दिया गया

ईश्‍वर के नाम पर

भ्रष्‍टाचार बढा दिया जा रहा है

ईश्‍वर के नाम पर

ईश्‍वर को सिंहासन से उतार

दिया जा रहा है

ईश्‍वर के नाम पर

मानवीय ईश्‍वर को

ताज पहनाया जा रहा है

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मेरे बच्‍चे का रूदन

 

हे ईश्‍वर

मुझे उसका रोना

देखा नहीं जाता

 

यह बाण सा

मेरे दिल को चुभ रहा है

वह भूखी है

उसे पिलाना है

स्‍तन दूध से भर उठा है

मैं परीक्षा पूरी करूं कैसे

दो घंटे और बचे हैं

सारे प्रश्‍न आसान है

उत्‍तर जानती हूं मैं

मैं ध्‍यान नहीं दे पा

रही हूं

कलम हिल नहीं रहा

मैं स्‍नातक एवं बेरोजगार हूं

पांच साल पहले बी.ए् की उपाधि ली

नौकरी के लिए कोशिश की

कई परीक्षा दी.

 

 

 

 

 

 

 

 

मेरे पति मजदूर है

परिवार में मां बाप

बहन मिलकर सात लोगों

का पेट भरना है

अरे मेरी बच्‍ची अभी भी सो रही है

भाभी कुछ नहीं कर सकती

मैं हॉल से निकलकर

घर चला जाउं

बच्‍ची को दूध पिलाने

ईश्‍वर, मेरी रूदन सुनते नहीं हो ?

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

किशोरावस्‍था

 

 

किशोरावस्‍था में

जोसफ के संग

नदी में मछली मारता

इंतजार करता

मछली के फंसने

के लिए

मच्‍छरों की काट सहता

 

एक बार मैंने एक मछली को पकड़ा

मुझे कुछ अलग महसूस हुआ

मेरे आंखों के सामने

उसके तडपने का दृश्‍य

आता जाता गया

मैंने मछली को कांटे

से छुड़ाकर

वापस पानी में

फेंक दिया

उसके बाद मैंने फिर कभी

मछली नहीं मारा

 

 

 

 

 

 

 

एक आनंदमय यात्रा

 

 

 

मेरा मन

चिंतन के परों पर

उपर उठकर

अगम्‍य जगहों पर

पहुंचने दो

 

यदि मुझे नीलसर

के पर होते तो

मैं अमरीका पहुंच

ओबामा से हाथ मिलाता

मेरे अमरीकी बहनों व भाईयों

का धन्‍यवाद अदा करता

यदि मेरे पास गिद्ध

के नाखून होते

तो मैं इराक से कंकाल

इकटठा कर हडिडयों के महल में

बुश को बंदी बनाता

 

 

 

 

 

 

यदि मैं परि सा

उड़ सकता तो मैं

सारे प्रवाचकों से

हजारों सांप्रदायिक मन में

मानवीयता भरने का गुहार करता

मैं गांधी से भी मिलता

जो अपने सपनों को

नष्‍ट होते देख

रो रहा है

 

यदि मैं गोली

होता तो

आतंकवादियों के सीने पर

उतरता

जो जवानों द्वारा

गलत काम करवाते

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ओम

 

 

ओम

यह संसार

शुरू हुआ

ओम से

सारा जग गूंज उठा

इस आवाज से

सभी सृष्टियों का ताल

अणु से नक्षत्रों तक

ओम बजता रहता है

विष्‍णु शिव और ब्रहम

का संयोजन

ब्रहमण माने सभी मंत्रों

का पिता

भूत और भविष्‍य

इसी ध्‍वनि से आबद्ध है

एक समय था जब

यह उच्‍च जात

का एकाधिकार था

निम्‍न जात के लोग

वंचित थे इससे

ओम

पवित्र मंत्र

मंत्रो का मंत्र

 

 

संसार के सारे प्रश्‍नों का हल

मन व शरीर

के लिए टानिक है

यह हमें शांति व खुशी

प्रदान करता है

ओम शांति

ओम शांति

ओम शांति

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अम्मिनी की मृत्‍यु

 

मेरी बिल्‍ली अम्मिनी की

मौत ने

मेरी नींद छीन ली

उसका सफेद रोम

मरकत आंखें

काली पूंछ

शांत व्‍यवहार

व उसका मेरी गोद

में लेटना बार बार

याद आ रहा है

उसकी मौत से

मैं दुखी हूं

उसको विष देकर

मार दिया गया

उसके सांस लेने

के लिए तड़पना

प्‍यास लगना

हमारे बचाने का प्रयास

सब याद आ रहा है

मेरा दिल परेशान है

 

 

 

 

हे ईश्‍वर

तुमने उसे

अपने पास क्‍यों बुलाया

वह एक साल

ही जीवित रही

वह मेरी अकेली

मां की दोस्‍त थी

मेरे दोस्‍त ने इसे

विष क्‍यों पिलाया

उसने इसका क्‍या बिगाड़ा

जब वह आराम से

सो रहा था

मेरी अम्मिनी का

सांस फूल रहा था

इस संसार में

हजारों लोग रहते हैं

इसे एक सुंदर घर में

बदलते हैं

मानो इसमें केवल

मानव को रहने का

हक है

हे ईश्‍वर इन्‍हें मानव बनाओ

और परियों में परिवर्तित करो

 

 

 

 

 

 

कैसा जन्‍म

 

 

वह सड़क बिछाने का

काम करता है

काम पूरा कर

वह घर लौट रहा है

वह झोपड़ी में

रहता है

उसके घर का दीवार

कार्डबोर्ड से बने हैं

दरवाजे पर कुंडी नहीं है

मां बीमार है

भूखी है

बेटी स्‍कूल से लौटी है

खाली पेट

घड़े में चावल पक रहा है

मां व बेटी के लिए

कुत्‍तों ने इसे खा लिया

शराबी पति

रात को आकर फिर लात मारेगा

हर दिन यही हालत है

यह कैसी जिंदगी है

 

 

 

 

 

 

वृंदा

 

 

 

मैंने कल टी वी में

वृंदा नामक लड़की को देखा

बारह या तेरह साल

की होगी

वह परी सी दिखती है

हिंदी फिल्‍मी गानों पर

मयूर सा नृत्‍य करती है

अरे यह तो एक

पांव पर नाच रही है

दूसरा पांव

स्‍कर्ट में मोडकर रखी होगी

थोड़ी देर बाद समझ में आया

कि उसकी एक ही पांव थी

विधाता ऐसा क्‍यों

वह अपने नृत्‍य द्वारा

हजारों को खुश रखती है

उसको कौन सांत्‍वना देगा

उसकी जिंदगी अभी शुरू

ही हुई है

 

 

 

एक पांव से मीलों दूर

जाना है उसे

उसने अपने चुनौतियों को

ताकत और सफलता में

बदल दिया है

यह संदेश है

दुनिया के लिए

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सूर्यग्रहण

 

 

चांद ने पूरी कोशिश की

सूर्य को ढकने का

लेकिन उसकी रोशनी

चांद पर गिरी

वह डर के मारे

उसके पास से चली गई

ज्ञान के सूरज को

चांद के आकाश से

ढका नहीं जाता

सदगुण के सूरज को

बहकाते हैं

भ्रष्‍ट सरकार

भोले सूरज को

निगल जाते हैं

उचित गलत है

गलत उचित है

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जन्‍मकुंडली

 

ज्‍योतिषियों का अन्‍नदाता

हिंदू शादियों का

दुश्‍मन

दैत्‍य जिसने

सपनों को चकनाचूर किया

और हजारों का खून चूसा

यह विज्ञान का संतान है

अच्‍छी जिंदगी के लिए

मनुष्‍य का बनाया

गया मार्ग

इसाई और मुस्लिम

इसे नहीं मानते

क्‍या इनकी जिंदगी

हिंदुओं से बदतर है

क्‍या जन्‍कुंडली

के अनुसार की गई

शादियों में

खुशी व शांति है

फिर

हजारों तलाक क्‍यों

शांति और खुशी

कर्म का फल है

जन्‍मकुंडली धार्मिक माफिया

 

का फल है

जनसाधारण के अज्ञता

के शोषण का साधन

लाखों लोग इस बुरे

चक्र में फंसे है

भविष्‍य में कोई मुक्ति

नजर नहीं आ रहा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

संरक्षण

 

 

हे कवि

तुम्‍हारी कलम को

मेरे रक्‍त से सने दिल में

ठूसने से पहले

मेरी बात सुनो

हालांकि मैं कागज का

एक टुकड़ा हूं

तुम्‍हारे जैसा मेरा भी

कंपायमान आत्‍मा है

तुम्‍हारे मिसाइल से

कचरा मत थूको

आप जितना कम लिखोगे

उतना हमारे परिवार को

सुकून मिलेगा

आज की जरूरतों पर लिखो

पेड़ पौधे, जीव जंतुओं के

संरक्षण पर लिखो

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

हाथी सनक

 

धरती पर

सबसे बड़ा प्राणी

यह अपनी याददाश व बुद्धि

के लिए जाना जाता है

खुद अपना आकार व

ताकत से अनजान

चतुर मनुष्‍य उसे

दास बना दिया

अपनी इच्‍छानुसार

काम करवाता है

वह ज्‍यादा ताप सह

नहीं सकता

उसे गर्मीमें सड़कों पर ले जाया

जाता है

न मानने पर महावत

पीटता है उसे

वह बड़े लटठों को खींचता है

अपनी पीठ पर यात्रियों को

ढोता है

मंदिरों में जशन के समय

खड़ा किेया जाता है

पटाखों व आवाजों मे उसे

उत्‍पीडित किया जाता है

तंग आकर महावत व भीड पर

टूट पडता है वह

 

क्‍या

ईश्‍वर हाथियों

के बिना

एवं भक्‍त हाथियों के बिना

रह नहीं सकते

समय आ गया है

कि उन्‍हें जंगलों में

भेजकर

उनकी और हमारी जिंदगी बचाएं

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भारत नं 1

 

 

 

मेरे देश के

साठ प्रतिशत लोग

बाहर मलत्‍याग करते हैं

छह सौ छब्‍बीस अरब की आबादी

मेरा भारत दुनिया में नं 1 है

विदेश में बसे मेरे भाई बहनों

आप हमारे राज्‍य की प्रगति से

वाकिफ नहीं है

सतानबे प्रतिशत लोग

पीने के पानी से वंचित है

फिर भी सरकार कहती है

देश तेजी से विकसित

हो रही है

हां सही है

विकास

देश के अरबपतियों

का हो रहा है

जो देश

में दो प्रतिशत हैं

 

 

 

 

 

 

 

 

जात के पागल

 

 

प्रकाश जाधव

उम्र बत्‍तीस साल

बारह लोगों की एक गुट ने

उस पर आक्रमण किया

उसका नाक काट डाला

इस घोर हिंसा का कारण ?

दलित होते हुए

उसने उच्‍च जात के लोगों के आगे

मोटोरबाइक चलाई

मेरा देश

सबसे बड़ा प्रजातंत्र है

यह कब जात और धर्म के चुगल

से मुक्‍त होगी

 

 

जून 2012 को मध्‍यप्रदेश में हुए वास्‍तविक घटना के आधार पर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अधूरे सपने

 

अठारह साल के

शिजिन दास और जिबिन

दोस्‍त हैं

इंटरमीडिएट पास हैं

दोनों युवा

देश की सेवा करना चाहते हैं

वे नौसेना मे भर्ती के लए

तैराखी सीख रहे हैं

पानी से भरे खेत में

डूब गए अचानकर

भारत मां

उन्‍हें क्‍यों डुबोया

वह आपको दुश्‍मन

से बचाने के लिए तैयार थे

 

 

12 जून 2012 में केरल के एणावूर में हुए हादसे पर आ‍धारित

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मेरे गुसलखाने में मकड़ी

 

 

मेरे गुसलखाने में मकड़ी

इसे मारूं या छोड़ दूं

यह तिलचटटों को खाती है

तिलचटटे मुझे काटते हैं

मैं सभी प्रजातियों को

प्‍यार करनेवाला कवि हूं

ऐसे में मैं क्‍या करूं ?

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मैं कौन हूं

 

 

तुम कौन हो

मेरे अहम ने पूछा

मैं प्रो डोमिनिक हूं

एम. ए. एम फिल. पी.एच.डी

मेरापहचान पत्र ने कहा

ठीक है और क्‍या

अंग्रेजी कवि , कहानीकार,

लेखक, समीक्षक, संपादक

अहम ने कहा इसे अपने पास रखो

अनपढ किसान इससे बेहतर है

आपके लेखन से महत्‍वपूर्ण इसकी सेवा है

उसका पसीना आपके श्‍याही से प्रिय है

यदि वे प्रहार करेंगें

तुम्‍ळारी लेखनी बंद हो जाएगी

और आप अप्रत्‍यक्ष हो जाओगे

उन्‍हें सहयोग दे,

उन पर लिखो

उनकी मानवता

के बारे मेंलिखो

 

 

 

 

 

 

 

 

विश्‍व चैंपियन के आंसू

 

 

 

भारतीय अंधे क्रिकेट टीम

को बधाईयां

2012 के विश्‍व विजेता हैं वे

ए मनीश को बधाई

मिडिल आर्डर बल्‍लेबाज

अच्‍छा फील्‍डर

फिनिक्‍स पक्षी सा उठा वह

दृष्टिवालों के लिए रोल मॉडल है वह

तीन साल के उम्र में

उसकी आंखों की रोशनी खो गई

उसकी झोपडी जल गई

बच्‍चा रो पड़ा

दूसरे दिन सुबह

उसके एक आंख की रोशनी खो गई

 

छह महीने पहले

पिता की मौत हुई

मां ने उसे अंधविदयालय में भेजा

वहां उच्‍च माध्‍यमिक स्‍तर तक

पढाई की

स्‍कूल मे उसके क्रिकेट की खूबी

को पहचाना गया

केरल टीम में चयनित हुआ

फिर भारतीय टीम में

चौबीसवें उम्र में विश्‍व चैंपियन

लेकिन उसकी खुशी

ज्‍यादा देर नहीं रहा

 

वह फिर से काम पर जाने लगा

अपने परिवार का ख्‍याल रखना था

तीन बहनें थी उसकी

एक की शादी करवानी थी

 

मनीश दया का पात्र है

एक सरकारी नौकरी चाहता है

देश की सेवा के लिए उपहार स्‍वरूप

 

 

 

 

समाचार पत्र में दिए गए रिपोर्ट के आधार पर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बीच बयूटिशियन

 

 

कोषिकोड बीच में

चार बयूटिशियनों ने बीच को

साफ किया

सैली और उसके तीन साथी

मुफत में सेवा करते हैं

छह बजे से शाम आठ बजे तक

जब दूसरे लोग सुबह चलते हैं

ये बीच साफ करते हैं

झाडू टोकरी

लेकर आते

सारा कूडा कचरा उठाते

खराब टाइल को सेट करते

दस दिन लगते एक छोर से

दसरे छोर में पहुंचने के लिए

वे सबके लिए रोल मॉडल है

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बेटा लिखो

 

बेटा

सृष्टि के पीछे

मेरा एक मिशन है

ईश्‍वर ने मेरे

कानों में कहा

तुम उपर क्‍यों

देख रहे हो  ?

 

तुम्‍हारे  कलम का

अग्रभाग देखो

मैं तुम्‍हारे कलम का

नोक हूं

कागज पर बहनेवाला शयाही

मैं हूं

बेटा लिखो

जब तक मैं रूकने के लिए

न कहूं लिखो

दो

क्‍या तुम्‍हें दुनिया की

सिम्‍फनी नजर नहीं आती है

मुझे दुख है कि

तुम्‍हारा प्रजाति मेरे ताल

को कभी नहीं समझा

जीव जंतु मेरे गानों पर

नाचते हैं

तीन

हरेक अणु में

ताल और मेल है

परमाणु में

हाथियों के चाल में

 

हिरण के दौड़ में

बाघ के गर्जन में

खरगोश के दौड़ में

चीता के लंबे कदम में

सुअर के झपट में

गिलहरी के तेज दौड़ में

कंगारू के पोइया में

भालू के पछाड़ में

घोड़े के सरपट में

सांड के छलांग में

कुत्‍ते के दौड़ में

जलकौवे की आवाज में

कौडिल्‍ला के डुबकी में

कौए के फड़फडाहट में

गिद्ध के उडान में

मैना के पंख में

भौरों के भिनभिनाहट में

 

सांप की गति में

शतपद की गति में

कीड़ों मकोड़ों की गति में

ताल है

सब जगह ताल है

और चिरस्‍थायी मेल है

 

चार

लिखो बेटा लिखो

तुम्‍हारा शरीर लयबद्ध है

तुम्‍हारे सांस में

दिल के धड़कन में

पलकों में

चलने और दौडने में

चबाने में

पेट के पचाने में

हंसी में

रूदन में

 

बातों में लय है

अरे, तुमने कभी इसे

पहचाना नहीं

 

 

पांच

 

लिखो बेटा लिखो

चिडियां और जंतुओं

में समस्‍वर है

मानव बेमेल है

तुम चिडि़यों का संगीत

उल्‍लू की घुघुआहट

काले कौए की आवाज

पपीहों की आवाज

 

चुज्‍जों की कूं कूं

तोते की कां कां

भरल की सीटी

पीरू का भकोसना

बुलबुल की आवाज

बतख की कां कां

मुर्गे की आवाज

कुत्‍तों का भौंकना

बिल्‍ली का म्‍याउं

भेड़ों का मिमियाना

गधे का रेंकना

शेर का दहाड़

लोमड़ी की चिल्‍लाहट

 

 

 

छह

 

लिखो बेटा लिखो

जीव जंतु और

र्निजीव सब परस्‍पर संबद्ध है

तुम्‍हारा अस्तित्‍व

दूसरों पर आश्रित है

मेरी सृष्टि

उपयोगी और सुंदर है

 

तुम्‍हारे तुच्‍छ भाव

के कारण तुम चीजों को

अलग रूप में देखते हो

सारे जीव जंतु अच्‍छे हैं

मेरे लिए और तुम्‍हारे लिए

बुरे हैं

सात

 

लिखो बेटा लिखो

तुम्‍हारा प्रजाति

अके‍ले नहीं रह सकता

 

भेड़, गधे, कुत्‍ता

सब तुम्‍हारे लिए

मैंने सृष्टि की है

तुम्‍हारे बिना उनका

अस्तित्‍व नहीं है

तुम उनसे खराब

भाषा में बतियाते हो

वे पवित्र भाषा में

तुमसे बात करते हैं

फिर भी तुम उन्‍हें मारते हो

 

आठ

तुम्‍हारी प्रजाति

मेरी अंतिम सृष्टि है

यह हजारों सालों का फल है

प्रगतिशीलता का

प्रतिगमन

क्‍या मेरी योजना

गलत थी या सही

क्‍या वह उल्‍टा मुझे

आ डसेगा

 

नौ

मैंने मानव के दिमाग में

एक जांच किया

कुछ केशों को

ज्ञान के बीज से भर दिया

अरे , वह तो

अपने को सभी अकलमंदी का

प्रभु समझता है

दुनिया पर विजयी पाने की

कोशिश करता है

 

मंगल में उपग्रह भेजता है

वह इसे बहुत बड़ी उपलब्धि मानता है

सूरज और मंगल

खगोलीय चीजों के समुंदर में

दो बूंद मात्र हैं

 

बेचारा अपनी सीमाओं के

बारे में नहीं जानता

वह खुद के

मेरी सृष्टि में सबसे

पवित्र मानना है

वह मुझे आकार देता है

और खुद को ईश्‍वर का

अवतार मानता है

मैंने उसमें

खगोलीय मूल्‍यों को फूंका

खुशी, सौंदर्य

शांति, प्‍यार, दया

 

लेकिन वह

घृणा और हिंसा को

प्रोत्‍साहित करता है

पौधे और जीव जंतुओं

के प्रति कोई दया नहीं दिखाता

दस

क्रिसमस तुम्‍हारा सबसे

बड़ा त्‍योहार है

एक दूसरे को

शांति और खुशी

का संदेश देते हो

 

तुम्‍हारी खुशी के लिए

हजारों मवेशी , मुर्गी

और मत्‍स्‍य को मार डाला जाता है

तुम खाते और नृत्‍य करते हो

शांति के गीत गाते हो

तुम्‍हारा जन्‍मदिन, शादी

पुरोहिताभिषेक जयंती

उत्‍सव और त्‍योहार

जानवरों के लिए अंतिम न्‍याय

का दिन है

इस प्रकार तुम

मेरा लय भंग करते हो

मेरी सृष्टि को मारने का अधिकार

तुमको किसने दिया

तुम पशुओं को

बिना आहार, पानी के

तड़पाते हो

 

ग्‍यारह

तुम प्रकृति से

क्‍यों नहीं सीखते

जीव जंतु

तुम्‍हारे लिए आदर्श हैं

प्‍यार, खुशी, मेहनत

परेशानियां, दया

क्षमा, मेल मिलाप

व कृतज्ञता का

 

 

बारह

 

लिखो बेटा लिखो

मेरे सिंफनी को

नकल करो

जगत का संगीत

तुम हवा, पत्‍ते

धुंध और हिम के

कीड़ों मकोड़ों की

दुनिया की पवित्र भाषा

को समझो

तेरह

लिखो बेटा लिखो

तुम मेघ गर्जन और बिजली

के सौंदर्य का आनंद नहीं

उठा सकते हो

 

तुम्‍हारे लोग

समझते हो कि बिजली से

मैं सजा सुना रहा हूं

उन्‍हें बताओ कि खगोलीय पिता

किसी से घृणा नहीं करता

अपनी सृष्टि से प्‍यार करता है

 

चौदह

 

लिखो बेटा लिखो

मैंने तुम्‍हें अपनी

योजनाओं को समझने

नहीं दी है

मैं तुमसे और

अन्‍य जीवों से

भिन्‍न तरह से बात करता हूं

मैं जब कड़क कर

बात करता हूं तो

कोई जवाब नहीं देता

 

हवा की आवाज

आंधी, लू

मैं भिन्‍न भाषाओं में

बात करता हूं

नदी, नाले

सागर, सभी में मैं

बात करता हूं

तुम जो सुनते हो

बहुत कम है

तुम्‍हारे कान के परे

बहुत कुछ है

 

पंद्रह

 

लिखो बेटा लिखो

तुम्‍हारी प्रजाति को

शालीन बनना है

मच्‍छर सा तुम मेरे प्रिय हो

सांप, कीड़े, मकोड़ें

सब मेर प्रिय हैं

तुमसे ज्‍यादा

मैं कोयल द्वारा

तुमसे बात करता हूं

 

सोलह

लिखो बेटा लिखो

तुम्‍हारे लोगों को

अपनी स्थिति समझाओ

 

सारी प्रजातियां नम है

केवल तुम्‍हारी प्रजाति को छोड़कर

धार्मिक माफिया

राजनैतिक माफिया

बौद्धिक माफिया

तुम नम्र लोगों को

गुमराह करते हो

 

सत्रह

धार्मिक माफिया

कई हजारों ईश्‍वर

की सृष्टि करते हैं

कई धर्म ईश्‍वर

संत , प्रवाचक

वे साधारण लोगों का

शोषण करते हैं

उन्‍होंने स्‍गर्व व नरक

की सृष्टि की

स्‍वर्ग किधर है

उनके पास कोई जवाब नहीं है

कोपालु ईश्‍वर

दोषी ईष्‍वर

 

हजारों को लूटते हैं

मुझे खुश करने

 

उन्‍होंने स्‍वर्ग एवं नरक

की सृष्टि की

ताकि लोगों को डराया जा सके

स्‍वर्ग कहां हैं

नरक कहां है

उनके पास कोई जबाब नहीं है

वे सारे गुण

सृष्टिकर्ता को देते हैं

मुझे खुश करने के लिए

वे लाखों को लूटते हैं

महल जैसे बड़े बड़े गिरजाघर

मस्जिद और मंदिर बनवाते हैं

मेरी नकली मूर्ति बनाकर

गहनों से सजाते हैं

इस प्रकार साधारण जनता को

गुमराह करते हैं

और जनताके मन में

यह धारणा पैदा करते हैं कि

मुझे संगीत

चापलूसी

पैसा

आहार

गहने

पसंद है

 

सबसे उत्‍तम प्रार्थना कर्म है

कार्य ही पूजा है

गरीबों की सेवा

शोषितों की सेवा

जीव जंतुओं का देखभाल

मुझे की गई सेवाएं हैं

चिडि़या

जीव जंतु

मछली

पौधों को देखो

वे अपना आहार पाते हैं

वे खुश हैं

कभी दुखी नहीं होते

धार्मिक माफिया

आम जनता को अंधा बनाते हैं

वे इनके शिकार बन जाते हैं

अठारह

लिखो बेटा लिखो

मैंने मनुष्‍य को शाकाहारी बनाया है

उनके पूर्वज बंदरो सा

 

धार्मिक माफिया गलत धारणा

फैलाते हैं

 

दुनिया में जीव जंतुओं

और पौधों के

लिए काफी आहार है

मैंने मानव को

मांसाहारियों सा

दूसरों को

मारने का हक नहीं दिया

सृष्टिकर्ता के नाते

मनुष्‍य का घरेलू

जीवोंको मारकर खाना

मुझे पसंद नहीं

उन्‍नीस

लिखो बेटा लिखो

राजनीतिक माफिया

साधारणजनता का

शोषणकरते हैं

 

उन्‍हें गुलाम बनाते हैं

जो सवाल करते हैं

उन्‍हें मार डालते हैं

ये कोरपोरेटों

की मदद करते हैं

साधारण जन को

नकारते हैं

जमीन और संपदाओं

को बेचते हैं

 

 

बीस

 

बौद्धिक माफिया

सर्वज्ञ बनता है

भोले लोगों का

शोषण करते हैं

उन्‍हें सृष्टिकर्ता से

अलग करते हैं

उन्‍हें नास्तिक बनाते हैं

उन पर दर्शनशास्‍त्र

थोपते हैं

 

बौद्धिक माफिया और

धार्मिक माफिया में

कोई फर्क नहीं है

दोनों सिक्‍के के दो भाग हैं

 

    इक्‍कीस

बस बेटा बस

तुम्‍हारे प्रजातियों के

बारे में

क्‍या कहना

 

अगर वे सुनेंगे तो

वे बचेंगे

दूसरे भी बचेंगे

पौधे भी बचेंगे

इस प्रकार दुनिया भी बचेगी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कौआ, काली सौंदर्य

 

 

 

कौआ

दुनिया का आम पक्षी

कूडा कचरा साफ करती है

कवियों ने कभी

इसकी स्‍तुति नहीं की

वे कोयल आदि का गुणगान करते हैं

 

कोयल कौए के

घोंसले में अंडा देती है

कौआ उसके बच्‍चों को

खिलाती है

 

फिर भी कौआ की

स्‍तुती नहीं की जाती

कोयल की स्‍तुती की जाती है

कबूतर प्‍यार

और नम्रता का प्रतीक है

यह क्‍यों है

कि सफेद आकर्षक और

काला अनाकर्षक है

कौआ कोयल सा

मीठा कब गाएगा

कब काले का

सफेद से रिश्‍ता होगा

 

 

कब काला और गोरा

एक घर में रहेंगे

आखिर हम कब

ईश्‍वर की सृष्टि

को निष्‍पक्ष तरीके से देखेंगे

और सभी रूपों में

सौंदर्य पाऐंगे

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

संकल्‍प

 

 

 

मुझे अपने आंखों

पर विश्‍वास नहीं हुआ

न ही सड़क पर

चलनेवालों पर

 

सब उपर की ओर

देख रहे थे

एक लंबे कांटेदार पेड़ पर

एक महिला चढी थी

लकड़ी के सीढी का

सहारा लेकर वह

वहां तक पहुंची

यह एक पुरूष का काम था

लेकिन उसने यह

काम क्‍यों करना चाहा

उसके मां बाप बीमार है

पति एक अन्‍य महिला के

साथ भाग गया

तीन बेटियों को छोड गए

 

 

 

 

 

वह मेहनत कर

कमा रही है

आत्‍मविश्‍वास के साथ

उसने संकल्‍प की

परिवार को आगे ले जाने का

उसका संकल्‍प मुझे

वर्डस्‍वर्थ का लीच गेदरेर

और हेमिंगवे के सांटियागो

की याद दिलाई

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

एक निर्भीक कोशिश

 

 

 

आसमान के नीचे

कुछ भी पवित्रता

को विभ्रांत नहीं

कर सकता

न गाड़ी

राहचालक

फोटोग्राफर

वह दसवीं कक्षा की

परीक्षा के लिए

तैयार हो रही थी

 

वह हर

तरह से तैयार हो रही है

 

वह झोपड़ी में

रहती है

मां बाप व भाइयों के साथ

सड़क किनारे का आवास

बगल में शिरीष के पेड़

के पीले फूल

उसे आशी्रवाद देते हैं

 

 

कोयल उसकी दृढता

के लिए गाती है

हवा उसके परेशानियों

को कम करती है

पवित्रता के सपने

और आकांक्षाएं

अंकुरित होने लगती है

क्‍या वह

पूरा पेड़ बन

उसके मां बाप को

छाया देगी

क्‍या उसकी आकांक्षाएं

आज के पूंजीवादी दुनिया

में टिकेगी  ?

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मैं केवल आम का पेड़ हूं

 

 

मैं केवल

आम का पेड़ हूं

मैंने अपनी जिदगी जी

सृष्टिकर्ता के योजना को

पूरी की

हिमालय रूपी छतरी सा

खड़े रहकर

बस के इंतजार में खड़े

छात्रों को छांव दी

उन पर सूरज का

कोई असर नहीं होगा

और बारिश का भी

उनका मुस्‍कान , हंसी

मुझे कभी रूलाता, कभी हंसाता

जब मेरा देास्‍त हवा

आता है

मैं उसका स्‍वागत करता हूं

मेरा रक्षक सूरज

उसकी रोशनी देती है

मेरे लिए खाना तैयार करती है

मैं बढता हूं

और दूसरों के लिए फल बनता हूं

जब मैं खिलता हूं

मक्खियां मुझे चुंबित करती है

मेरी टहनियां चिडि़यों के लिए बिस्‍तर है

कोयल,  कौआ और मैना आते हैं

मेरे फल पकने पर

उनके लिए पर्व होता है

उनकी चहचहाहट और गाने

अक्‍सर मुझे सुलाते हैं

 

रात को वे

मेरी गोदी में सोते हैं

जमीन पर सोए भिखारी

के लिए पीले फल छोड़ता हूं

हे ईश्‍वर

मैं बहुत खुशी महसूस

करता हूं

जब सेवा का फल मिलता है

अरे लड़का लड़की से

क्‍या कह रहा है

प्रिय, इस पेड के

काटे जाने पर

हम कहां इंतजार करेंगे

प्रिय, वे पेड़़ को

क्‍यों काटना चाहते हैं

जो हजारों को छांव देती है

वे वहां वेटिंग शेड बनाना

चाहते हैं

हे ईश्‍वर, क्‍या यह सही है

हां बेटा, मैं कुछ नहीं कर सकता

वे मुझ पर रहम करें

कहीं ओर नहीं बना सकते

मैं तो सबका भला करती हूं

हालांकि मैं चुप हूं

मेरी भी भावनांए है

मुझे भी दर्द होता है

क्‍या मुझे रहने

का हक नहीं है

हे ईश्‍वर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मजदूर

 

 

 

धनलक्ष्‍मी

ग्‍यारह साल की है

मां बाप ने धन की

इच्‍छा कर उसे

धन की देवी का नाम रखा

उसके मां बाप बीमार

और गरीब हैं

बच्‍चों का परवरिश

नहीं कर सकते

गरीबी के कारण

उन्‍हें सबसे बड़े बच्‍चे

को बेचना पड़ा

 

भारी दिल से

सजल आंखों से

माथे पर चुंबित करते हुए

उसे विदा की मां ने

मां के कांपते

हाथों में पांच हजार रूपए

थमा दिए गए

 

 

 

धनलक्ष्‍मी रोते रोते

मालिक के साथ

अनिच्‍छा से चली गई

 

युवा वकील

पत्‍नी और बच्‍चों

के सा‍थ रहता है

आलीशान मकान में

धनलक्ष्‍मी खाना पकाती है

झाडू पोछा करती है

 

उसकी मृदुल हाथों

में छाले पड़ गए

पति और पत्‍नी

शराब पीते हैं

उसे तंग करते हैं

सिगरेट से उसके हाथों को

जला डाला

बेचारी सो रही थी

उसका दुख दर्द

समझने के लिए दुनिया

में कोई नहीं है

वह चाहती थी कि

उसके मां बाप

उसे वापसघर ले चलें

 

उसकी आयु के बच्‍चे

को स्‍कूल जाते देख

वह रो पड़ी

रात भर काम कर

सुबह समय पर उठ नहीं सकी

मालकिन ने उसे पर

गर्म पानी फेंका

बेचारी दर्द के मारे

चीख पड़ी

चीख सुनकर

पड़ोसी दौड आए

बच्‍ची को अस्‍पताल ले गए

 

लोगों ने

वकील को गाली दी

और पुलिस को फोन की

थोड़ी देर में पुलिस आकर

उन्‍हें हथकडी लगा ले गए

 

टी वी चेनलों में

खबर आ गई

हजारों ने बच्‍ची

 

 

के लिए प्रार्थना की

लेकिन सभी को

दुखी कर वह

हमेशा के लिए

यह दुनिया छोड़ चली गई

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भूखे

 

 

प्‍यारे बेटे

खाना खा लिया क्‍या

जल्‍दी खाओ

 

मां, बस बस

अब और खाया

नहीं जाता

इतना सारा खाना

बाकीक्‍यों रखा

इतने में

एक बच्‍चे की भूख

मिटाई जा सकती है

जान बचाई जा सकती है

हमारे देश में

हजारों बच्‍चे भूखे हैं

बाकी छोडे खाने से

नब्‍बे प्रतिशत भूखों की

भूख मिटाई जा सकती है

बेटा

जब भी तुम

खाने के सामने बैठते हो

भूखे बच्‍चों का रूदन सुनो

माओं का असमर्थता जानो

माफ करो मां

अहिंदा से खाना

नहीं छोडूंगा

मां हम थोडा

सा खाना खाकर

भूखों के लिए बाकी भेजेंगे

हां बेटा

हमसे जो होगा

हम करेंगें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

काश मैं वापस लौट पाता

 

काश मैं

समय के भुजाओं

पर बैठकर

मेरे बचपन में लौटता

 

मैं मित्रों

और सहयोगियों के साथ

खुश रहता

जिन्‍होंने मुझे प्‍यार किया

आज के मेरे मित्र

स्‍वार्थ और झूठे हैं

फिर मैं

अपने बेटे और बेटी को

गोदी में बिठाता

उन्‍हें प्‍यार करता

उन्‍हें कंधों पर उठाता

उनकी तोतली बोली सुनता

उनके नन्‍हें पावों से

चलने का आनंद उठाता

दोनों अब सयाने हो

गए हैं

 

मैं अपनी मां

से ज्‍यादा प्‍यार कर पाता

उसकी मदद करता

मेरे बातों से

उसे खुश करता

उसके पांव दबाता

उत्‍सव के समय

उसके लिए नए कपडे खरीद

कर देता

मैं उसके प्‍यार के बदले में

कितना कुछ

दे पाता

मैं इतना ही

आग्रह कर सकता हूं कि

वह स्‍वर्ग

पहुंचे

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डा.  के. वी. डोमिनिक

 

 

 

जन्‍म              : 13 फरवरी 1956 को केरल के कालड़ी में

 

शिक्षा                : एम. ए., एम. फिल, पी एच डी (अंग्रेजी साहित्‍य )

 

प्रकाशन            : 23 किताबें जिनमें कविता, आलोचना, संपादन

आदि शामिल हैं. इनमे प्रमुख हैं विंगड रीसन, राईट मैं सन राईट एवं मल्‍टीकल्‍चेरेल सिंफनी(कविता संग्रह) , इस्‍ट वेस्‍ट कानफलक्टि इन द नोवल्‍स आफ आर के नारायण , पोस्‍ट कोलोनियल रीडिंग्‍स इन इंडो आंग्‍लियन रीडिंगस, सेलेक्‍टेड शोर्ट स्‍टोरीज इन इन इंडो आंग्‍लियन लिटरेचर (आलोचना). वे गिल्‍ड आफ इंडियन इंगलिश राइटर्स के सचिव और आई जे सी एल पत्रिका के संपादक हैं. देश में राष्‍ट्रीय एवं अंर्तराष्‍ट्रीय स्‍तर की संगोष्ठियों का आयोजन किया.

 

 

पुरस्‍कार     : इंटरनेशनल पोएट्स अकादेमी, चेन्नई, की लाईफ टाइम अचीवमेंट पुरस्‍कार, इंडिया इण्टर-कौनटिनैंटल कल्चरल एसोसिएशन, चंडीगढ़ का साहित्‍य शिरोमणि पुरस्‍कार

 

ई मेल    : prof.kvdominic@gmail.com

 

मोबाईल      : 9947949159

 

डा. संतोष अलेक्‍स

द्विभाषी (मलयालम और हिन्दी) कवि, लेखक और बहुभाषी अनुवादक। उनको VIT विश्वविद्यालय, चेन्नई से के. सत्चिदानन्दन और केदारनाथ सिंह की कविता पर हिन्दी में पीएच. डी. है। डा. संतोष उत्तर औपनिवेशिक साहित्य अंग्रेजी, हिन्दी और मलयालम में अनुवाद करता है। उन्होंने पिछले 21 वर्षों के लिए अनुवाद के माध्यम से भारतीय साहित्य को समृद्ध किया गया है। वह 9 पुस्तकें हिन्दी में और अंग्रेजी अनुवाद में में दो है